स्कूलों में कुरान कम्पलसरी क्यों नहीं कर देते मोदी?
स्कूलों में कुरान कम्पलसरी क्यों नहीं कर देते मोदी?
अगर मोदी मुस्लिमों के एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में लैपटॉप देना चाहते हैं तो फिर सरकारी स्कूलों में कुरान कम्पलसरी क्यों नहीं कर देते :-
हाँ जी मोदी जी को मदरसों से लगाव नहीं है और न ही मुस्लिमों से
भाजपा स्कूल में गीता तो कम्पलसरी करवा सकती है मगर कुरान नहीं
मोहसिन अल्वी एडवोकेट
जिस शख्स को मुस्लिम टोपी पहनने पर एतराज हो, वो शख्स कैसे मुस्लिम मदरसों की तरक्की कर सकता है। हाँ जी मोदी जी को मदरसों से लगाव नहीं है और न ही मुस्लिमों से। अगर मदरसों से या मुस्लिमो से लगाव होता तो मुस्लिम बस्तियों में बने सरकारी स्कूलों में कुरान की शिक्षा कम्पलसरी करवा देते। मगर वो ऐसा नहीं करवाएंगे। भाजपा स्कूल में गीता तो कम्पलसरी करवा सकती है मगर कुरान नहीं और ये मदरसों में लैपटॉप का इस्तेमाल करना व मदरसों का आधुनिकीरण करना इनका मुस्लिम प्रेम नहीं है बल्कि मदरसों पर कब्ज़ा करके धीरे धीरे इनका पतन करना है। जिस तरह भारतीय इतिहास से भाजपा ने मुगलकाल को हटा कर सिर्फ हिंदुत्व भर दिया है, जिस तरह उर्दू भाषा को खत्म करके मुस्लिमों का इतिहास मिटाना चाहती है, उसी तरह मदरसों पर कब्ज़ा करके इन्हें भी बर्बाद करना चाहती है। क्योंकि अगर आज इस्लाम की तारीख(इतिहास)किसी को पता है तो वो हमारे उलेमा इकराम हैं, जिन्होंने मदरसों से तालीम हासिल की है। अगर आज इस्लाम की सही तारीख कहीं मिलेगी तो वो उर्दू की किताबों में मिलेगी।अगर जंगे आजादी की सही तारीख कहीं मिलेगी तो वो उर्दू की किताबो में मिलेगी। अगर मुसलमानों की कुर्बानियों के किस्से मिलेंगे जो उन्होंने इस देश को तराशने के लिए दी थीं, तो वो उर्दू किताबों में मिलेंगी।
कुछ साल पहले मैंने और अभी जल्दी में ही मैंने आगरा और दिल्ली के लाल किला में लाइट एंड म्यूजिक शो सुना और देखा था जो रोजाना रात में होता है। उस शो में बताया जाता है कि इस देश को मुगलों ने क्या दिया। न इस देश में खाने के लिए कुछ खास था न रहने के लिए और मैं ये दावे के साथ कह सकता हूँ कि कुछ दिनों बाद इस लाइट एंड म्यूजिक शो को बंद कर दिया जाएगा। इसलिए भाजपा ने इसी इतिहास को मिटाने के लिए साजिशें रच डाली और उर्दू को ख़त्म करने के लिए मदरसों पर कब्ज़ा करने की सोची। इसलिए भाजपा उर्दू का वजूद ख़त्म करके मुस्लिमों की तारीख मिटा देना चाहती है। जब इनका वजूद खत्म हो जाएगा जब इनकी तारीख मिट जाएगी, तो इन्हें अपनी ताक़त का एहसास ही नहीं होगा। उस वक़्त मुस्लिम कौम की हालत ऐसे हाथी के बच्चे की तरह होगी जिसके पैरों में एक झंझीर बंधी होगी और वह हाथी का बच्चा बड़ा होकर ये सोच रहा होगा कि जब बचपन से अब तक इस जंजीर को मैं नहीं तोड़ पाया तो अब क्या तोड़ सकता है। जबकि इस जवानी के समय हाथी के पास इतनी ताक़त है कि वो जंजीर तो क्या उस खम्बे को भी उखाड़ सकता है जिससे उस जंजीर को बाँध रखा है। ठीक इसी तरह मुस्लिम कौम से उसकी ताकत की पहचान छीन ली जाएगी कि उसे पता ही नहीं होगा कि 313 का लशकर क्या था और हम क्या थे, हमने इस देश को क्या दिया और अब हम क्या हो गए।
अगर मदरसों में सरकार का दखल होगा तो मदरसों का पतन होगा
मेरी बात को ध्यान रखना अगर मदरसों में सरकार का दखल होगा तो मदरसों का पतन होगा और पूरा इतिहास बदल दिया जाएगा जैसे स्कूली किताबों का बदल दिया गया है, ये बात भाजपा के एजेंडे में शामिल है, कि किसी भी तरह हिंदुस्तान से मुस्लिम शासकों का नाम हटा कर और इनका इतिहास मिटा कर हिंदुस्तान को पूर्ण रूप से हिन्दू राष्ट्र बनाना है और ये साबित करना कि पहले भी ये हिन्दू राष्ट्र था।
एक वो भी दौर था जब गैर मुस्लिम भी उर्दू पढ़ा करता था और एक आज का दौर है कि मुस्लिम भी उर्दू नहीं पढ़ा करते है। सरकार ने मुस्लिम बस्तियों में सरकारी स्कूलों में ऐसे अध्यापक नियुक्त कर रखे हैं, जिन्हें उर्दू नहीं आती और जिन्हें थोड़ी बहुत आती भी है तो वो पढ़ाते नहीं है। जबकि नियम के अनुसार जिस स्कूल में 75% बच्चे मुस्लिम हैं वहां उर्दू पढाना कम्पलसरी है। मगर न तो सरकार इस तरफ ध्यान देती है और न ही मुस्लिम समाज। आज जरुरत है कि अपने बच्चों को उर्दू के साथ-साथ अपनी तारीख पढ़वाएं। वर्ना इकबाल की वो बात बिल्कुल सच हो जाएगी जिसमे उन्होंने कहा है कि,
"ना समझोगे तो मिट जाओगे ऐ हिंदुस्तान वालों,
तुम्हारी दास्ताँ तक भी न होगी दस्तानों में"।
(मोहसिन अल्वी एडवोकेट, की फेसबुक टाइमलाइन से साभार)


