बहुत दिनों से झारखण्ड में चुनाव प्रचार चल रहा है। जिसमे सबसे मुखर रूप से भारतीय जनता पार्टी के चेहरे महान भारत देश के प्रधानमंत्री द्वारा ये कहा जा रहा है कि जिन्होंने झारखण्ड को लूटा है व विकास नहीं होने दिया उन्हें बेदखल करना है व स्थायी सरकार ही राज्य का विकास कर सकती है जैसे लोकलुभावन नारे के साथ अपनी सभा की शुरुआत करते हैं।
मैं यहाँ आपके सामने कुछ आंकड़े रखना चाहता हूँ जो इन दोनों बातो को ख़ारिज करते हैं।
पहला कि झारखण्ड का गठन 15 नवंबर 2000 को हुआ था। उस वक़्त भाजपा ने सत्ता संभाली थी। तब से लेकर आज तक आचार संहिता लागू होने तक कुल 5121 झारखण्ड में शासन रहा है। जिसका हम अलग अलग करके देखें तो भाजपा नें कुल 2982 दिन, झारखण्ड मुक्ति मोर्चा नें 306 दिन, निर्दलीय नें 1212 दिन, व राष्ट्रपति शासन 621 दिन रहा है।
http://en.wikipedia.org/wiki/List_of_Chief_Ministers_of_Jharkhand
कुल का अगर हम प्रतिशत निकालें तो लगभग 60 % समय तक भाजपा का ही शासन रहा है। जितने मुख्य कंपनियों के साथ राज्य की सम्पदा के साथ खिलवाड़ करने वाले समझौते हुए हैं वो सब के सब महान राष्ट्र भक्त भाजपा के शासन काल में हुए हैं। झारखण्ड को तो भाजपा नें ही सबसे ज्यादा लूटा है।
दूसरा के स्थायी सरकार ही राज्य का विकास कर सकती है को अगर मोदी जी के मॉडल गुजरात का उदाहरण लें तो हम पाते हैं कि राज्य में गृह विभाग, सूचना जनसम्पर्क विभाग, विधायी कार्य एवं संसदीय कार्य, जलसंसाधन/नर्मदा, राजस्व विभाग एवं जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विभाग इंचार्ज सेक्रेटरी के भरोसे चल रहे हैं।
http://www.gujaratindia.com/whos-who/secretaries.htm
राज्य मे माननीय उच्च न्यायलय अहमदाबाद के समक्ष 320 जनहित याचिकाएं आज की तिथि तक वर्ष 2014 दाखिल हो चुकी हैं।
http://gujarathc-casestatus.nic.in/gujarathc/tabhome.jsp
याचिकाएं शिक्षा, नौकरी, मानवाधिकार, जबरन भूमि अधिग्रहण आदि जनहित के व्यापक मुद्दो की हैं। राज्य में मानवाधिकार आयोग के दो सदस्यों में से एक, रजिस्ट्रार, लॉ (विधि) अधिकारी के पद रिक्त है,
http://ghrc.guj.nic.in/Documents/Gshrc-OrgnStruct.pdf
राज्य में अलपसंख्यक आयोग नहीं है।
http://timesofindia.indiatimes.com/city/ahmedabad/RTI-exposes-phoney-minority-panel-claim/articleshow/33572152.cms
राज्य के बाल अधिकार आयोग के सदस्यों के अधिकार आज तक वर्णित नहीं हैं। शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत वर्ष 2013 में 49 बालको व 2014 में 614 के दाखले हुए हैं।
http://www.outlookindia.com/article/An-Unequal-Childhood/291801
ये साफ़ दिखाता है कि राज्य में कितना विकास स्थाई सरकार नें किया है।
वहीँ हम देश अन्य राज्यों में आधार पर स्थाई सरकार वाले राज्यों पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, तमिलनाडू, तेलंगाना, केरला, असम, मेघालय आदि प्रदेशों में यही प्रधानमंत्री महोदय तानाशाही सरकार का आरोप लगाते घूम रहे हैं। इससे भी साफ़ होता है कि ये सारे नारे जनता को गुमराह कर सत्ता को हथियाने वाले हैं।
जनता के मुद्दे बिजली, रोज़गार, पानी, पर्यावरण से भटका कर सुनहरी सपनों की दुनिया को दिखा कर देश का निजीकरण कर अपनी झोली भरने का मामला है।
O- मुजाहिद नफ़ीस
मुजाहिद नफ़ीस, बाल अधिकार कार्यकर्ता