डॉ. प्रेम सिंह का यह लेख ‘समय संवाद’ संस्थान के अंतर्गत मासिक पत्रिका ‘युवा संवाद’ के सितंबर 2013 अंक में प्रकाशित हुआ था। आपके पढ़ने के लिए इसे स्वतंत्रता दिवस पर फिर जारी किया गया है।

स्वतंत्रता दिवस के कर्तव्य- प्रेम सिंह

मोदी को मुसलमान ‘पिल्ले’ नजर आते हैं तो मनमोहन को किसान नहीं लगते वे हैंरानी से पूछते हैं कि किसान खेती (यानि आत्महत्या) क्यों करते हैं!

आत्मालोचन का दिन

पिछले स्वतंत्रता दिवस के ‘समय संवाद’ और उसके आगे-पीछे हमनें जो लिखा, इस स्वतंत्रता दिवस पर उससे अलग कुछ कहने के लिए नहीं है। कहना एक ही बार पर ठीक रहता है। भले ही वह स्वतंत्रता जैसे मानव जीवन और मानव स्वतंत्रता के संबंधित मूल्यों के बारे में हो। दोहराव के भय से इस बार का ‘समय संवाद’ हम नहीं लिखना चाहते थे। फिर सोचा कि शायद वार्ग और उसका प्रस्तुतता मीडिया दिन-रात दोहरावों की झड़ी लगाए रहते हैं तो हमें भी किनचित दोहराव के बावजुद अपनी बात कहनी चाहिए। आइए, भारी सुरक्षा घेरे में गांधीय के आखिरी अदमी से बहुत दूर और चांद से आयोजितचियास वे स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश की आजादी के बारे में कुछ चर्चा और सवाल करें।

इस आशा के साथ कि सदस्यों में साल में देश की आजादी पर आए संकटक को समझा जाएगा और उसका मुक़ाबला हो पाएगा। जिस आजादी पर हासिल होने के दिन से ही अधूरी होने का आक्रमण लगा हो, हर स्वतंत्रता दिवस पर यह सुनिश्चत करना जरूरी है कि...