शेष नारायण सिंह
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष चंचल का आज लिखत पढ़त वाला जन्मदिन है। हो सकता कि यही उनका सही जन्मदिन भी हो। अगर ऐसा है तो उनको जन्मदिन की बधाई।
आज मैं, गंगा, गोमती, सई और पीली नदियों के बहाव के साथ बचपन और जवानी बिता चुके इस छोरे की जीवन यात्रा को याद करना चाहता हूँ क्योंकि उसी यात्रा में पता लगेगा कि आज़ादी मिलने के बाद पहले दशक में जन्म लेने वाले लोगों के सपने किस तरह से चकनाचूर हुये हैं। किस तरह से इस पीढ़ी ने 67-68 के आस-पास सोचा था कि बरगद और झोपड़ी निशान वाली पार्टियाँ सामाजिक न्याय की वाहक बनेंगी, लेकिन वह सपना टूट गया। इस पीढ़ी ने मधु लिमये और जार्ज फर्नांडीज़ के जुझारूपन को देखा है, उनके साथ जुलूसों में शामिल हुये लेकिन देखा कि एक दिन मधु ने सक्रिय राजनीति से तौबा कर लिया और जार्ज फर्नांडीज़ आरएसएस के खिदमतगार बन गये। इस पीढ़ी की परवरिश काँग्रेस विरोध की घुट्टी के साथ हुयी थी, जवान होने पर इन लोगों ने संजय गांधी,अंबिका सोनी और इंदिरा गांधी की कांग्रेस को नफरत किया था लेकिन एक मुकाम आया जब इसने कांग्रेस में ही वह ताक़त देखना शुरू कर दिया जो फासिज्म को हरा सकती है।
मुझे याद है जब 2003 के दिल्ली विधान सभा के चुनाव में मैंने और मेरे साथियों ने कांग्रेस को वोट दिया था तो कितना अजीब महसूस किया था। आज वही कांग्रेस जवाहरलाल नेहरू के एक वंशज के चलते जन संगठन नहीं रह गया है। वही नेहरू जो महात्मा गांधी की उस मुहिम के हरावल दस्ते में शामिल थे जिसने कांग्रेस को वकीलों की पार्टी से हटाकर आज़ादी की लड़ाई की पार्टी बनाया था। आज राहुल गांधी ने उस पार्टी को चंद ऐसे लोगों के कब्ज़े में दे दिया है जो जानते ही नहीं कि कांग्रेस क्या है। लेकिन मेरी और चंचल की पीढ़ी उसमें ही फासिज्म को रोकने का विकल्प देख रही है। लेकिन हमें मुगालता नहीं है, चंचल को भी नहीं होगा। हम जानते हैं कि फासिज्म नहीं आयेगा क्योंकि इस देश में 1975 वाले फासिज्म को जनता रोक चुकी है, 2014 में भी जीत जनता की होगी और चंचल की पीढ़ी के समाजवादी और इन्साफ पसंद लोगों को किसी हिटलर के कैम्प में नहीं रहना पड़ेगा। जन्मदिन की बधाई,साथी चंचल सिंह,चंचल कुमार और chanchal Bhu.
शेष नारायण सिंह, लेखक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं। वह इतिहास के वैज्ञानिक विश्लेषण के एक्सपर्ट हैं। नये पत्रकार उन्हें पढ़ते हुये बहुत कुछ सीख सकते हैं।