जुगनू शारदेय

कभी खुद पर कभी हालत पे शरम आया , बेशरम हैं हम इतने कि हर बात पे न शरम आया । हम तो समझे थे कि बात खत्म हुई , है यह कैसी बात कि हर बात पे हवा हवाई आया …अब तो हमें लिखते हुए शर्म आती है सीज़र से भी ज्यादा सीजर की बीवी की ईमानदारी पर कि हर खेल में मिस्टर इंडिया तू गायब भी रहा तो तेरा नाम आया । अब जितनी छूट दी जाती है प्रधानमंत्री को उतनी एक चोर को भी मिले जो कहे हुजूर ,गलती हुई ,हमका माफी दे देव ।
अब जरा यह किस्सा देखिए । यहां कोई बेचारा एक राजा नहीं है । न ही रानी नीरा राडिया है । न किसी रतन टाटा का नाम आता है , न कोई एन के सिंह अपनी शेखी बघारता है । न हमारी बिरादरी की महारानी का नाम आता है , न ही खानसामा ए खास का जिक्र आता है । न अनिल अंबानी सीबीआई के सामने अपनी मनमर्जी कोई कहानी सुनाता है । बेचारा एक राजा की कहानी में कैग बाबू ने पौने दो लाख करोड़ का घाटा दिखलाया था । काबिल वकील कपिल सिब्बल ने उसे जीरो पर पहुंचाया था । अब यहां कैग बाबू बताते हैं घाटा दो लाख करोड़ का ।
पहले से भी ज्यादा – लगा न जोर का झटका और ये कहते हैं कि हुजूर ,गलती हुई ,हमका माफी दे देव ।
यही तो खासियत है हमारे ईमानदार श्री में देते हैं तो हमेशा देते हैं जोर का झटका । जरा सोचिए कि यह लोग कितने बड़े और समझदार हैं । यह दलित – पिछड़ा – आदिवासी – औरत भी नहीं कि जिनके पास नासमझी के अलावा कुछ नहीं होता । यह धरती – आकाश के बाप अंतरिक्ष के संचालक हैं । इनसे कैसे गलती हो जाती है कि कैग बाबू पकड़ लेते हैं । जब पकड़ लेते हैं तो अंतरिक्ष के मालिक कहते हैं कि हुजूर ,गलती हुई ,हमका माफी दे देव ।
सारा काम बड़े कायदे से होता है । सुरक्षा के मामले की कैबिनेट की कमिटी बैठती है । यह कहती है कि अंतरिक्ष आयोग ने सिफारिश की है कि देवास यूं
मामला अंग्रेजी है , यह डी वास भी हो सकता है । मतलब कि एक प्रायवेट लिमिटेड कंपनी है । इसके साथ इसरो – हमारा अंतरिक्ष अनुसंधान की दुकान है । इसका काम सैटेलाइट बनाना और हवा हवाई करना है । अंतरिक्ष पर इनका कब्जा है । इनकी भी एक कारोबारी गुमटी है ऐंटरिक्स । तो इस ऐंटरिक्स और डी वास के बीच सस्ते में जो कारोबारी समझौता 2007 में हुआ , वह रद्द किया जाता है । संसद में आप चिल्लाओ तो गला फाड़ जवाव पाओ , हुजूर ,गलती हुई ,हमका माफी दे देव ।
अब इस सवाल का जवाब कोई नहीं बताता कि इतने ज्ञानवानों से गलती कैसे हुई । काहे बेचा हजार करोड़ रुपए में 70 मेगाहर्ट्स का एस बैंड स्पेक्ट्रम जिस पर कैग बाबू की नजर लग गई । अब या तो कैग बाबू की आंख का कोई कसूर है या हमारे बड़े लोगों के फितरत का असर है कि सरकार लूटने की चीज होती है , लूटते जाओ । एक राजा पर तो कार्रवाई और हर सवाल पर गठबंधन धर्म की दुहाई । इस बार हमरी मुरगी ने कुंकड़ूं कू न की तो मुरगा ही बोला जाने मन गर बुरा हूं , पर इतना भी न बुरा कि जो न दे सको तो कोई बात नहीं , वरना ,गलती हुई ,हमका माफी दे देव ।