हवाओं में, पानियों में रेडियोएक्टिव डालर बहार, वायव्रेंट गुजरात हुआ देश रे !
हवाओं में, पानियों में रेडियोएक्टिव डालर बहार, वायव्रेंट गुजरात हुआ देश रे !
बंगाल और असम के दिग्विजयी अश्वेमेधी घोड़े अब बिहार का रुख कर चुके हैं। मगध साम्राज्य पर विजय पताका फहराने वास्ते स्वयंसेवकों को प्रथम सिपाहसालर अमित शाह का फरमान जारी हो चुका है। दूसरा रुख तस्वीर का यूं है कि इंडिया बिजनेस लीडर अवॉर्ड्स में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि बड़े फैसले सिर्फ बजट में होंगे ऐसा नहीं सोचना चाहिए, देश की तरक्की के लिए सरकार बजट के बाहर भी बड़े फैसले लेती रहेगी। साथ ही उन्होंने इस बात का भी भरोसा दिया कि सरकार रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स का इस्तेमाल नहीं करेगी क्योंकि इससे देश की छवि खराब होती है। वित्त मंत्री ने ये भी उम्मीद जताई कि साल 2015 पिछले साल से बेहतर होगा।
इथे उड़े हो, उथे उड़े हो, डालर छायो जमीन आसमान। टाइटैनिक हुआ हाथ निवेशकों के हाथ में है कि बिजनैस फ्रेंडली फिजां है कयामती।
इंफ्रास्ट्रक्चर अब देशज अर्थव्यवस्था का बुलेट हीरक आधार और नागरिक सगरे निराधार। हुई इंफ्रास्ट्रक्चरवा खातिर अब अरबिटरेशन इंटरनेशनल है।
न्यूट्रल जमीन मसलन कि सिंगापुर हांगकांग दुबई कि वाशिंगटन मा फैसला होने को है उजाड़, उजाड़, उजाड़ का।
तू का उखाड़ लिबो रे। अनाड़ी हलवाहा, जमीनर फजीहत।
देखतड़ कि कैसन गुजरात मां वायव्रेंट हुआ देश के किसान तमाम धर लियो गयो रे।
नतीजो खखलन बाड़न कि डालरों की बरसात हुई गयो रे गुजरातम मा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्थिर नीति और कर प्रणाली के जरिए भारत को कारोबार करने के लिहाज से 'सबसे आसान' देश बनाने के वादे के बीच वाइब्रेंट गुजरात में निवेश संबंधी तमाम बड़ी घोषणाएं की गई। अंबानी, अडाणी, बिडला, सुजुकी व रियो टिंटो जैसी दिग्गज कंपनियों ने 1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश तथा लगभग 50,000 नए रोजगार देने की प्रतिबद्धता जताई। मोदी ने सभी क्षेत्रों के 'सचमुच व्यापक' विकास का वादा भी किया जबकि वाइब्रेंट गुजरात समिट के पहले दिन उद्योगपतियों ने भारी निवेश की प्रतिबद्धता जताते हुए विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने अपने भाषण में कहा कि गुजरात आकर बहुत अच्छा लगा। मोदी ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में गुजरात को संभावनाओं वाला राज्य बनाया है। उन्होंने कहा कि मोदी का पीएम बनना बड़ी उपलब्धि है। उनके पीएम आवास तक पहुंचने का मतलब है कि भारत बदल रहा है।
गौरतलबे है कि इसी अमेरिका में प्रधानमंत्री बनने से पहले गुजरात नरसंहार कारणे मोदी अवांछित रहे हैं।
अब महेंदर सिंह टिकैत किसानों को भर-भरकर का हांगकांग, सिंगापुर वाशिंगटन ले जात बै।
टिकैत तो अब नाहीं रे। भट्टा परसौल, नंदीग्राम सिंगुर को बाट लगाओ खातिर 1884 का जमीन हड़पो कानून लार्ड डलहौजी के सांढ़ों के साथ बहाल हुइब करै है तो कोई अडानी मोर तोर बाप नाही कि उड़ाके ले जाइबो न्यूट्रल कंट्री के तू उहां विरोध धरना प्रदर्शन करबो।
आज को दिन तो गुजराती रंग बिरंग में ठेठ रंग चौपाल ह। का का लग रियो रे नजीर हाट मा, देखन वास्ते पइसा नहीं चाहिए बै। घोंघिया आंखि, मुस नाक खुलल के चाहि। जो देख सके है, देख मेरी जान। जो सूंघ सकै है सूंघ मेरी जान।
निसार अली भाई ने सुबोसुबह कान उमेठदियो के नाचा गम्मक नाचा गम्मक जो हल्ला मचा रहा मैं, वो दरअसले नाचा गम्मत है।बोलियों में महीन फर्क है।बोलियों की खिचड़ी जो पका रहे हम, उ में मोर बाप बड़ी गडबड़ी हुई गवा री। हमका माफी दे दियो। इससे बड़ी गड़बड़ी यह भी के हम निसार भाई को जहां तहां नासिर भाई लिख रहे हैं। वो नासिर हमारे सत्तर दशक के हीरो रहे। नासिर हुसैन आजाद हिंद फौज वाले और नासिरवा समांतर सिनेमा वाले के जुबान से हटता नहीं वो नासिर बे। इ निसार है, निसार तेरी गली वाला। तनिको बूज लीज्यो।
गनीमत है कि हम मकबूल फिदा हुसैन जैसे बड़का तोप नहीं, वरना पता नहीं किस मुल्क में बसना पड़ता। कल ही समकालीन तीसरी दुनिया का अंक आया कि पाकिस्तान में वामपंथ के हाल हकीकत की पड़ताल है। अबही पढ़ रिया हूं। आप भी पढ़ लें। और क्या गजब हुआ के कल के रोजनामचे का जवाब यह है।इससे भढ़िया उनकी प्रतिक्रिया है, जो अंग्रेजी में लिख दियो कि हाईली इररीलिवेंट। गैर प्रासंगिक क्या है, गांधी, सेवाग्राम या फिर हमारा लेखन। समझ में नहीं आया। पण किन्हीं बंगभूमि के राजू बाबू के परामर्श मानें तो इस केसरिया कारपोरेट राज में किसी विचार विमर्श की कोई संभावना नहीं है।
हम तो हे राम को याद कर रहे थे। जयश्री राम का हांका लग गयो रे। बाबरी फिर ढहना है। य़रूसलम फिर कब्जाना है। अबहीं तो हम गांधी की बात कर रहे हैं कि सत्याग्रह अब भी जारी है। अंबेडकर पर तो कायदे से बात शुरु ही नाही कर सकत है।
सेवाग्राम में पुणे करार पर दस्तखत पर कोई बोर्ड नहीं दिखा। हिंदू समाज के विभाजन विरुद्धे बापू के अनशन की तारीख दर्ज है। अंबेडकर संगे गांधी की तस्वीरे संग संग हैं।
हम तो बहस ऐइसन चाहते हैं कि अंध विश्वास निर्मूल समिति का एजंडा ही बदल देबे करै कि गांधी और अंबेडकर को एक दूसरे से बढ़ चढ़कर दिखाने वाले अंध भक्तों,यह बात गांठ बांध लेवके चाहि के हमको हऊ नाही चाहि।जिस हउ के पीछे लाग गो रे अपना साईनाथ भाया आउर आपना जयदीप हार्डीकर। परीकथा अभिषेकवा ने बांच दीहन है। हमरे खातिर साईनाथ और जयदीप रूरल इंडिया और जनपदों के विशेषज्ञ पत्रकार रहे हैं हमेशा। कभी कभार संवाद भी रहा है दोनों के साथ। हम परी के साथ बैठने कूं तैयार भी बैठे थे कि रुरलइंडियाआनलाइन तो हमरी भी महात्वाकांक्षा है।
हमऊ चाहत है नयका मीडिया जहां जनता के आखिर सुनवाई हो। अपने संसाधनों से आनंद स्वरुप वर्मा और पंकज बिष्ट जैसे लोगोन के साथ हमऊ सत्तारधसक से झख मार रहे हैं। सोशल मीडिया से जूझ रहे हैं इसी वास्ते। लेकिन कारपोरेट फंडिंग से कारपोरेट राजनीति की तर्ज पर नयका मीडिया हमऊ ना चाही। बंद दरवाजा बंद खिड़कियों के खिलाफ हम भी नाही हो सकै है। साईनाथ और जयदीपका पुराना रिकार्ड जनपद खातिरे जबरदस्त है। परी महात्वाकांक्षा की उड़ानो खातिर ङम उन्हें अबहीं खारिज नाही कर सकत हैं। अभी इंतजार है कि वो काका का कर रियो है,बूझ लें,देख लें।
हम सेवाग्राम के परिप्रेक्ष्य में पुणे करार पर बहस जरुर चाहबे करै हैं। गांधी बाबा और बाबा साहेब मिलकर जो गुल खिला दियो सन 1932 में हिंदू समाज का विभाजन रोकने वास्ते, वहींच से सुरु हो गयो हिंदुत्व का यह ध्रुवीकरण और वहींच हिंदू साम्राज्यवाद की नींव है। देश बेचने वालों की मौलिक जनम कोख फेर वही पुणे करार है।
हिंदू साम्राज्यवाद के नवतम अद्यतन विष्णु अवतार नाथूराम गोडसे के बारे में लिखने के खातिर पाकिस्तान जाने का बहुजन फतवा है तो आखेर गांधी अंबेडकर विमर्श पर नयी विवेचना की हांक लगाने पर हमका वास्ते इस जहां में सर छुपाने लायक कोई जगह बचेगी या नहीं, फेर बड़ी फिक्र का मसल हुआ बै चैतू।


