हिन्दुस्तान हो या पाकिस्तान, सरकारें और अदालतें भी चुप हैं...राष्ट्रवाद की बाढ़ जो आई हुई है
हिन्दुस्तान हो या पाकिस्तान, सरकारें और अदालतें भी चुप हैं...राष्ट्रवाद की बाढ़ जो आई हुई है
मसीहुद्दीन संजरी
कुलभूषण जादव को फांसी की सज़ा राष्ट्रवादी राजनीति को खाद पानी देगी। सीमा के इस पार भी और उस पार भी। जनता कभी इधर बिलबिलाएगी कभी उधर आंसू बहाएगी। राजनेता सुर्खियां बटोरेंगे इधर भी और उधर भी।
भस्मासुर भी प्यारा लगता है जब तक वह उसे मारता है जिससे हम नफरत करते हैं।
लाहौर हाईकोर्ट में कुलभूषण यादव का केस कोई वकील नहीं लड़ेगा। यह फरमान है लाहौर बार कौंसिल का। भारत में भी इसी तरह के फरमान बार कौंसिल्स जारी करती रही हैं और जनता वकीलों के साथ मिल कर अदालतों में ऐसे मुकदमें लड़ने वालों को पीटती भी रही है।
अभी हाल ही में गुजरात में राम सेना ने आईएस के आरोपियों का मुकदमा लड़ने वाले वकील और उसके पूरे परिवार को खत्म करने धमकी दी थी। नतीजे के तौर पर कोई वकील तैयार नही हुआ। पाकिस्तान हो या भारत इस तरह के फरमान निंदनीय और असंवैधानिक हैं।
दोनों देश अपनी न्याय व्यवस्था का मज़ाक बनते देख रहे हैं। सरकारें और अदालतें भी चुप हैं। राष्ट्रवाद की बाढ़ जो आई हुई है।


