ट्रंप का समर्थन बलात्कारी का समर्थन है, अंतिम जीत ईरान की ही होगी

मिडिल ईस्ट का मौजूदा संकट सिर्फ़ दो देशों के बीच का टकराव नहीं है। यह उस बड़े सवाल की याद दिलाता है कि ऊर्जा, भू-राजनीति और वैश्विक शक्ति संतुलन आज भी दुनिया की राजनीति को किस तरह प्रभावित करते हैं।

Update: 2026-03-13 11:45 GMT

होर्मुज की जंग! क्या दुनिया की अर्थव्यवस्था पर कब्ज़ा चाहता है ट्रंप?

  • ईरान-अमेरिका टकराव: क्या होर्मुज जलडमरूमध्य है असली वजह?
  • क्या दुनिया की अर्थव्यवस्था की चाबी एक छोटे से समुद्री रास्ते में छिपी है?

और क्या उसी रास्ते पर कब्ज़े की लड़ाई से शुरू हुआ है ईरान-अमेरिका टकराव?

अब यह साफ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान युद्ध का एक मात्र उद्देश्य होर्मुज जलडमरू मध्य पर अपना प्रभुत्व कायम करना रहा है, ताकि सारी दुनिया को अपनी मुट्ठी में ले सके। बाकी सारी बातें कोरी बकवास हैं।

ईरान-अमेरिका युद्ध से सारी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए होर्मुज जलडमरू मध्य का असीम महत्व सामने आ चुका है। सारी दुनिया में तेल की आवाजाही का 20 प्रतिशत होर्मुज जलडमरू मध्य से होता है।

जो ट्रंप अमेरिका के लिए सारी दुनिया को लूटने के उपायों की तलाश में लगातार इधर-उधर हाथ-पांव मार रहा है, उसकी लालची नज़रों को जब नेतन्याहू जैसे शैतान ने होर्मुज की ओर मोड़ा तो वह इस पर लपक पड़ने की अपनी वासना को क़ाबू में नहीं रख पाया।

अन्य को कमज़ोर पा कर उसका बलात्कार करना ट्रंप की वर्षों पुरानी आदत है।

एपस्टीन फ़ाइल बताती है कि उसने न जाने अब तक कितनी बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाया होगा।

ईरान पर कूद पड़ने के पीछे भी इस साम्राज्यवादी दस्यु की उसी बेकाबू वासना की भूमिका प्रमुख है। ट्रंप समझ गया है कि यदि होर्मुज उसके क़ब्ज़े में आ गया तो वह दुनिया के किसी भी देश की, ख़ास तौर पर दक्षिण और दक्षिण- पूर्व एशिया के देशों की कभी भी गर्दन दबोच सकता है।

इस सोच की उत्तेजना में उसे अभी होश ही नहीं है कि वह क्या बोल रहा है, क्या कर रहा है। बस ईरान को दबोच कर खा जाना है !

कभी शासन में परिवर्तन, तो कभी ईरान के पास परमाणु शक्ति न रहने देने, तो कभी स्वतंत्र समाज के लिए जन विद्रोह का आह्वान, तो कभी किसी कट्टरतावादी अमेरिका-परस्त मौलवी के हाथों ईरान को सौंपने की बात।

ट्रंप की बेसिर-पैर की बातें उसके राक्षसी, जनसंहारकारी लुटेरे इरादों को छिपा नहीं पा रही है।

सारी दुनिया इस वक्त के सबसे ताक़तवर बलात्कारी की करतूतों से हतप्रभ है और उसे दुनिया धिक्कार रही है।

ईरान के पास हौसला है तो संसाधन भी कम नहीं है। उसे दुनिया के हर नेकदिल, मानवीय व्यक्ति और व्यवस्थाओं का समर्थन है।

भारत के कुछ एपस्टीनपंथी जरूर इस बलात्कारी की आरती उतार रहे हैं। उनमें बीजेपी जैसा शासक दल और उसका गोदी मीडिया भी शामिल है।

पर यह तय है कि अंतिम जीत ईरान की ही होगी। उसकी जीत में ही मानवता की जीत है।

अरुण माहेश्वरी

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