पासपोर्ट रिन्यूअल और वोटर लिस्ट विवाद: जॉन ब्रिटास का जयशंकर को पत्र

सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर कहा कि वोटर लिस्ट से नाम हटना पासपोर्ट रिन्यूअल रोकने या नागरिकता पर सवाल उठाने का कानूनी आधार नहीं है;

By :  Hastakshep
Update: 2026-06-30 08:33 GMT

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सीपीआई(एम) सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से वरिष्ठ पत्रकार राजगोपाल रामदास के पासपोर्ट नवीनीकरण मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। ब्रिटास का कहना है कि पश्चिम बंगाल में विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटना न तो नागरिकता निर्धारण का आधार है और न ही पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत पासपोर्ट रिन्यूअल से इनकार करने का वैधानिक कारण। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों, पासपोर्ट अधिनियम, नागरिकता अधिनियम और संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए सरकार से स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने की मांग की है। यह मामला मतदाता सूची, नागरिकता और पासपोर्ट कानून के बीच संबंध को लेकर महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न उठाता है

राजगोपाल रामदास का पासपोर्ट विवाद क्या है?

जॉन ब्रिटास ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को क्या लिखा?

क्या वोटर लिस्ट से नाम हटने पर पासपोर्ट रिन्यूअल रोका जा सकता है?

पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 6 क्या कहती है?

नागरिकता अधिनियम, 1955 और वोटर लिस्ट में क्या अंतर है?

SIR (Special Intensive Revision) क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने पासपोर्ट और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर क्या कहा है?

सतवंत सिंह साहनी और मेनका गांधी मामलों का महत्व

क्या चुनाव आयोग नागरिकता तय कर सकता है?

जॉन ब्रिटास ने विदेश मंत्रालय से क्या मांग की?

नई दिल्ली, 30 जून 2026. राज्यसभा सांसद और राज्यसभा में सीपीआई(एम) [CPI(M)] के नेता डॉ. जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को एक पत्र लिखकर वरिष्ठ पत्रकार राजगोपाल रामदास के पासपोर्ट नवीनीकरण (renewal) को रोके जाने के मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।

इस पत्र में उठाए गए मुख्य बिंदुओं और तथ्यों का विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है:

1. मुख्य मामला और पृष्ठभूमि

प्रभावित व्यक्ति: यह मामला वरिष्ठ पत्रकार और 'द टेलीग्राफ' (The Telegraph) के पूर्व संपादक श्री राजगोपाल रामदास से संबंधित है।

समस्या: पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision - SIR) के दौरान मतदाता सूची (electoral roll) से नाम हटा दिए जाने के एकमात्र आधार पर उनके पासपोर्ट के नवीनीकरण को कथित तौर पर रोक दिया गया है। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय द्वारा जारी पत्र में केवल एक प्रतिकूल परिस्थिति दर्ज की गई है: "मतदाता सूची से नाम हटाया गया (Voter list deleted from SIR)"।

पूर्व इतिहास: श्री रामदास को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2005 में भारतीय पासपोर्ट जारी किया गया था, जिसे वर्ष 2015 में नवीनीकृत भी किया गया था। उनके पते, माता-पिता के नाम, पहचान या राष्ट्रीयता में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

2. डॉ. जॉन ब्रिटास द्वारा उठाए गए कानूनी और संवैधानिक तर्क

डॉ. ब्रिटास ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गंभीर संवैधानिक निहितार्थ हैं:

पासपोर्ट अधिनियम, 1967 का उल्लंघन: पासपोर्ट अधिनियम की धारा 6 उन परिस्थितियों को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करती है जिनके तहत पासपोर्ट देने से इनकार किया जा सकता है। इस अधिनियम में मतदाता सूची से नाम हटने या विशेष गहन संशोधन (SIR) की कार्यवाही लंबित होने को पासपोर्ट रोकने का वैधानिक आधार नहीं माना गया है।

संवैधानिक अधिकार और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले:

सतवंत सिंह साहनी बनाम सहायक पासपोर्ट अधिकारी (1967): इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने माना था कि विदेश यात्रा का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत 'व्यक्तिगत स्वतंत्रता' का एक अभिन्न अंग है।

मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978): इस ऐतिहासिक फैसले में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार से जुड़ा है। पासपोर्ट अधिनियम के तहत किसी भी शक्ति का प्रयोग निष्पक्ष, उचित और गैर-मनमाने ढंग से होना चाहिए।

विशेष गहन संशोधन (SIR) पर हालिया फैसला: सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक हालिया फैसले में दोहराया है कि चुनाव आयोग का कार्य केवल मतदाता सूची तैयार करने तक सीमित है। यह नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत नागरिकता का निर्धारण नहीं है। जब चुनावी प्राधिकरण स्वयं नागरिकता का अंतिम निर्धारण नहीं कर सकता, तो मतदाता सूची से नाम हटने को पासपोर्ट रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

विभिन्न वैधानिक प्रणालियों का आपस में घालमेल: नागरिकता अधिनियम (1955), पासपोर्ट अधिनियम (1967), और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (1950) अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं। मतदाता सूची का संशोधन नागरिकता निर्धारण के समान नहीं है। इन दोनों को आपस में मिलाना एक ऐसी अयोग्यता को जन्म देना है जिसे संसद ने कभी कानूनन लागू नहीं किया।

पुलिस सत्यापन (Police Verification) की सीमा: पुलिस सत्यापन का उद्देश्य पासपोर्ट प्राधिकरण को आवेदक की पहचान, पते और पूर्ववृत्त (antecedents) के बारे में तथ्य प्रदान करना है, न कि नागरिकता पर राय देना या उसका निर्धारण करना। केवल मतदाता सूची से नाम हटने के आधार पर प्रतिकूल पुलिस रिपोर्ट को निर्णायक नहीं माना जा सकता।

3. विदेश मंत्री से की गई मांगें

डॉ. जॉन ब्रिटास ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से निम्नलिखित अनुरोध किए हैं:

1. तत्काल हस्तक्षेप: श्री राजगोपाल रामदास के मामले की शीघ्र जांच की जाए और उनके पासपोर्ट नवीनीकरण के आवेदन पर पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के प्रावधानों के तहत केवल योग्यता के आधार पर विचार किया जाए।

2. स्पष्टीकरण/परामर्श (Advisory) जारी करना: सभी पासपोर्ट प्राधिकरणों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं कि मतदाता सूची से नाम हटना या विशेष गहन संशोधन (SIR) के तहत कार्यवाही लंबित होना, अपने आप में पासपोर्ट नवीनीकरण को रोकने या देरी करने का वैधानिक आधार नहीं हो सकता।

3. पुलिस सत्यापन की सीमा तय करना: यह स्पष्ट किया जाए कि पुलिस सत्यापन अपने कानूनी दायरे तक ही सीमित रहे और पासपोर्ट अधिनियम के तहत आवश्यक स्वतंत्र वैधानिक संतुष्टि को किसी अन्य कानून के तहत दर्ज प्रशासनिक निष्कर्ष से प्रतिस्थापित न किया जाए।

FAQs

क्या वोटर लिस्ट से नाम हटने पर पासपोर्ट रिन्यूअल रोका जा सकता है?

डॉ. जॉन ब्रिटास का तर्क है कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो केवल मतदाता सूची से नाम हटने के आधार पर पासपोर्ट रिन्यूअल रोकने की अनुमति देता हो।

SIR क्या है?

Special Intensive Revision (SIR) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना है, नागरिकता का अंतिम निर्धारण करना नहीं।

क्या चुनाव आयोग नागरिकता तय करता है?

सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों के अनुसार चुनाव आयोग का दायित्व मतदाता सूची तैयार करना है। नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत होता है।

पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 6 क्या कहती है?

धारा 6 उन परिस्थितियों की सूची देती है जिनमें पासपोर्ट जारी करने या नवीनीकरण से इनकार किया जा सकता है। जॉन ब्रिटास का कहना है कि वोटर लिस्ट से नाम हटना इनमें शामिल नहीं है।

अनुच्छेद 21 का इस मामले से क्या संबंध है?

सुप्रीम कोर्ट ने Satwant Singh Sawhney और Maneka Gandhi मामलों में माना कि विदेश यात्रा का अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Article 21) से जुड़ा है और पासपोर्ट संबंधी निर्णय मनमाने नहीं हो सकते।

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