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मथुरा के चौबों का परिवर्तित संसार और इतिहास की धर्मनिरपेक्ष परंपरा
मथुरा का कंस मेला : विगत 70 सालों में चतुर्वेदी जाति (मथुरा के चौबों ) गुणात्मक तौर पर बदली है। उसमें विभिन्न पेशेवर वर्गों का जन्म हुआ है। इस समय एक...
विमर्श के लिए ज़रूरी नहीं होते हैं शब्द !
जब सोशल मीडिया नहीं देखती हैं गीतांजलि श्री तो जवाब किसे दे रही हैं? लकान का ‘बिना शब्दों का विमर्श‘ और गीतांजलि श्री का व्यवहार.












