हस्तक्षेप - Page 23
‘इंडिया’ से पहले मोदी-शाह के दावों ने ही सत्ता पलटी
‘370 और 400 पार’ की खुली पोल. ‘मोदी है तो मुमकिन है’ वाले फ़ॉर्मूले की बदौलत कहीं इनका हश्र भी शरद पवार और उद्धव ठाकरे जैसा ना हो जाए!
लोकतंत्र की राह में किन आवाजों को सुनना चाहिए
नवउदारवाद अथवा वित्तीय पूंजीवाद के तीन दशकों के बाद यह एक खुली सच्चाई है कि मुख्यधारा राजनीति से विचारधारा का दाना-पानी लगभग उठ चुका है। यहां तक कि...















