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चौथा खंभा

2014 के बाद भारतीय पत्रकारिता का रूपांतरण: राजनीतिक अर्थशास्त्र, बाज़ारवाद और लोकतांत्रिक...

2014 के बाद भारतीय पत्रकारिता में आए बदलावों का आलोचनात्मक विश्लेषण। नीरज कुमार का यह लेख राजनीतिक सत्ता, बाज़ारवाद, कॉरपोरेट मीडिया, टीआरपी संस्कृति...

अव्यवस्थित लोकतंत्र और साहित्यिक पत्रकारिता: स्वतंत्र भारत में साहित्य का बदलता स्वरूप
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अव्यवस्थित लोकतंत्र और साहित्यिक पत्रकारिता: स्वतंत्र भारत में साहित्य का बदलता स्वरूप

यह लेख प्रोफेसर जगदीश्वर चतुर्वेदी द्वारा स्वतंत्र भारत में साहित्यिक पत्रकारिता की यात्रा, संपादकीय विवेक, सत्ता-संबंध और लेखकों की स्वायत्तता के...

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